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Showing posts from January, 2016

'शाह' क़ाबिल या सिर्फ़ मोहरा

भारत गाँवों का देश कहा जाता है और इन्हीं गाँवों में अब से कुछ समय पहले तक एक कहावत प्रचलित थी- ' भारत माँ की तीन धरोहर , अटल आडवाणी मुरली मनोहर ' , यह देखने में आया है कि पिछले एक दशक में यह कहावत धीरे-धीरे लोगों की जुबान से उतर सी गई है , क्योंकि इसके किरदार गुमनाम हो गये। हम बात कर रहे हैं ‘ भारतीय जनता पार्टी ’ की जिसके रीढ़ यही त्रिमूर्ति थे। अटल बिहारी वाजपेयी , लालकृष्ण आडवाणी और डॉ मुरली मनोहर जोशी। यही तीन थे जिनकी छत्रछाया में पार्टी और कार्यकर्ता चल रहे थे। वरिष्ठ स्तंभकार प्रदीप सिंह कहते हैं- ‘ मनुज बली नहि होत है समय होत बलवान ’, अगर वाजपेयी जी को छोड़ दें तो ये दोनों भी समय के शिकार हुएऔर धीरे-धीरे राजनैतिक नेपथ्य में चले गये या कहें कि धकेल दिये गये। सत्ता परिवर्तन के साथ ही इनकी भूमिका बदली और इन दोनों बुजुर्ग नेताओं को मार्गदर्शक मंडल में डाल दिया गया , जिनसे पार्टी को कोई मार्गदर्शन नहीं लेना है। अगर मीडिया की भाषा में बात करें तो अब मुख्यधारा में इन तीनों के स्थान पर नरेंन्द्र मोदी , राजनाथ सिंह और अमित शाह आ गये हैं। हाल ही में अमित शाह को दोबारा भा...

बेलगाम अफसरशाही

मध्यप्रदेश विधानसभा में तीन बार दस्तक देने वाले पूर्व राज्यमंत्री व विधायक '' लोचनलाल ठाकरे '' आजकल कलेक्टर कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं ,  परंतु सफलता नही मिल रही है। जी हाँ। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के  '' कटंगी ''  सीट से तीन बार विधायक व एक बार प्रदेश के   कृषि राज्यमंत्री रहे लोचनलाल  '' नारायन ठाकरे ''  प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही बुजुर्ग पेंशन योजना के तहत मिलनेवाले मुवावजे को प्राप्त करने के लिये कलेक्टर कार्यालय जाते हैं और रोज अफसरों की नई दलीलें सुनकर खाली हाँथ वापस आ जाते हैं। सत्ताधारी पार्टी के विधायक गिरीश गौतम कहते हैं - नेता इलेक्शन से चुनकर आते हैं और अफसर सिलेक्शन से।   हम  जनता की सेवा करते हैं और ये शोषण। कुछ ऐसी ही नेताओं की टिप्पणियाँ और भी हैं जो प्रदेश की बेलगाम अफसरशाही की तरफ इशारा करती हैं।   गुना जिले के चाचौड़ा से विधायक ममता मीड़ा कहती हैं कि जिले के कलेक्टर एसपी ने मेरा नंबर अपने   मोबाइल   से ब्लाक कर रखा है। प्रदेश की अफसरशाही के बारे में कुछ इसी तरह की प्रतिक्रिया ग्वालियर दक्षिण से विधा...