पत्रकारिता- एक परिचय
पेशे और पैसे में ना सिर्फ शाब्दिक बल्कि व्यावहारिक दृष्टि से भी बड़ा ही सूक्ष्म अंतर होता है। आमतौर पर हर पेशेवर की यही चाहत और उम्मीद होती है कि वह जिस भी पेशे में जा रहा है उसमें उसे भरपूर पैसे मिलें , भरपूर कहना ठीक नहीं होगा क्योंकि भरपूर तो शायद तब होता है जब संतोष का भाव आ जाता है , और पैसों को लेकर संतोष का भाव आ जाए, ऐसा संभव ही नहीं है। इसीलिए भरपूर ना भी मिलें तो कम से कम इतनी आय तो जरूर हो जिससे कि पेशेवर का जीवन सुचारू रूप से चल सके। वह अपनी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ ही सामान्य जीवन जी सके। यह सच है कि एक आम पेशेवर इतना कमा भी लेता है और अपनी इच्छाओं के घोड़े को काबू में रखकर सामान्य जीवन भी जी लेता है , परंतु पत्रकारिता के साथ ऐसा नहीं है। यह एक ऐसा पेशा रहा है जिसके साथ पैसे का कोई मेल नहीं है। शायद इसलिए क्योंकि इसके साथ सेवा का भाव जुड़ गया है , जनसरोकार जुड़ा हुआ है। एक पत्रकार अपने पेशे के जरिए देश और समाज की बुराइयों और कुरीतियों को उजागर करता है। जाहिर है यही वो वजहें हैं जो इसे आम पेशे से अलग करती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि पत्रकारिता की शुरुआत ही मि...